सात रंग से रंगा नभ में,
इंद्रधनुष उग आया।
छाता ओढ़े बंटी राजा,
देख-देख मुस्काया।
रिमझिम सावन की फुहार में,
फूल सभी को भाया।
बारिश के मौसम में बगिया,
जीभर खूब नहाया।
सावन में झूले पर झूलें,
मेरा मन हर्षाया।
पेंग बढ़ाकर नभ को छू लें,
अहा! अब मज़ा आया।
वर्षा में कुछ भीग-भीगकर,
किसने गाना गाया?
लगे नाचने मोर छमाछम,
सबका मन हरियाया।
— डॉ. सतीश चन्द्र भगत
दरभंगा, बिहार