मेरी बहना (बाल गीत) - अशोक श्रीवास्तव

एक बड़ी, दो छोटी बहना,
एक खरी, दो खोटी बहना।

सदा झगड़ती रहती मुझसे,
जो है सबसे मोटी बहना।

सनक चढ़ी है स्लिम होने की,
खाती आधी रोटी बहना।

जब-जब करूँ शिकायत उसकी,
काटे मुझे चिकोटी बहना।

ज़िद अपनी मनवा लेगी वह,
धरती पर है लोटी बहना।

गर्दन झटके स्टाइल में,
करती है दो चोटी बहना।

आड़ी-तिरछी चालें चलती,
है शतरंज की गोटी बहना।

कोई मुझसे भिड़कर देखे,
कर दे बोटी-बोटी बहना!


- अशोक श्रीवास्तव
रायबरेली, उत्तर प्रदेश 

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