श्रावणी पूर्णिमा का विहान,
है सजी मिठाई की दुकान।
राखी में कितने रंग भरे,
सबको आकर्षित ख़ूब करे।
बहनों के हाथों भाई का,
होना है नूतन अभिनंदन।
आया पावन रक्षाबंधन।
भाई करता उपहार भेंट,
उमड़े आँसू खुशियाँ समेट।
रोली-अक्षत, आरती, सूत,
बंधन का है यह शुभ मुहूर्त।
प्रतिवर्ष नयापन लगता है,
होता जाता संबंध सघन।
आया पावन रक्षाबंधन।
- सत्यम् दुबे 'शार्दूल'
(प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश)