राखी का त्योहार (कविता) - अनीता मिश्रा 'सिद्धि'

सावन लेकर आ गया, राखी का त्योहार।
भाई की कलाई सजे, बहना का उपहार।।

झूले पड़ते डाल पर, गूँजे मधुर मल्हार,
मेंहदी रचती हथेलियाँ, महके मन-संसार।
भैया की राहें निहारती, बहना बारंबार,
सावन लेकर आ गया, राखी का त्योहार।।

माथे पर रोली लगा, माँगे यह वरदान,
मेरे भइया का सदा, बना रहे सम्मान।
रेशम के धागे में बँधा, स्नेह भरा संसार,
सावन लेकर आ गया, राखी का त्योहार।।

दूर भले ही हो गए, मन तो पास-पास,
राखी के इस पर्व पर, खिल उठती हर आस।
भाई-बहन के प्रेम का, जग में अनुपम सार,
सावन लेकर आ गया, राखी का त्योहार।।


- अनीता मिश्रा 'सिद्धि'
विश्राम निवास, कालीकेत नगर, पटना

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