बोधायन पत्रिका: शब्द, संस्कृति और चेतना का अधिष्ठान
"बोधायन" केवल एक नाम नहीं, बल्कि ज्ञान की उस सनातन परंपरा का प्रतीक है जो हमें सत्य, शोध और विवेक की ओर ले जाती है। महान ऋषि और गणितज्ञ बोधायन के गौरव को समर्पित यह पत्रिका साहित्य, कला, समाज और संस्कृति के अंतर्संबंधों को रेखांकित करने का एक विनम्र प्रयास है।
हमारा उद्देश्य: आज के बदलते दौर में जहाँ गाँव, लोक-परंपराएँ और हमारी बोलियाँ (जैसे हमारी मिट्टी की महक और बज्जिका संस्कृति) शहरीकरण की धुंध में खो रही हैं, 'बोधायन' उन बिखरे हुए मोतियों को सहेजने का संकल्प है। हमारा उद्देश्य गंभीर सामाजिक विमर्श को मंच देना, नवोदित प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और स्थापित साहित्यिक मूल्यों को एक नया आकाश देना है।
— संपादकीय मंडल, बोधायन पत्रिका
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