युद्ध करके
क्या भला
हासिल करोगे!
क्षत-विक्षत लाश,
चीखें,
हवा दमघोंटू,
बाप-माँ के
उड़े चिथड़े,
बच गया छोटू;
छलछलाती
आँख की
भाषा पढ़ोगे?
गंध बारूदी
न विचलित
तुम्हें करती,
तोप-ड्रोन-
मिसाइलों से
त्रस्त धरती;
ऐटमों से
कौन-सी
सूरत गढ़ोगे?
तितलियों के
नोचकर पर
क्या मिलेगा?
चहचहाहट
को मिटाकर
क्या मिलेगा?
किलकते
अधरों पे
अंगारे धरोगे?
मारकाट,
तबाहियाँ,
बस हैं दनुजता,
हिटलरी
फ़रमान से
पीड़ित मनुजता;
आँसुओं से,
ख़ून से
सागर भरोगे?
हल नहीं
है युद्ध,
सीखो बुद्ध से तुम,
बाज़ आओ
वहशीपन से,
युद्ध से तुम;
अमन से ही
मूल्य की
चोटी चढ़ोगे।
भगवती प्रसाद द्विवेदी
सर्जना, सृजनशील कालोनी,बिस्कुट फैक्ट्री रोड, मगध आईटीआई के निकट, नासरीगंज, दानापुर,
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परिचय
हिन्दी और भोजपुरी के लब्धप्रतिष्ठित कथाकार, कवि, समालोचक और लोक साहित्य के अध्येता। बाल साहित्य के समर्पित रचनाकार। हिन्दी और भोजपुरी की २१-२१ और बाल साहित्य की शताधिक कृतियाँ प्रकाशित, विभिन्न राज्यों की पाठ्यपुस्तकों में संकलित और अंग्रेजी व भारतीय भाषाओं में अनूदित।