देश-प्रेम पर जाँ न्योछावर ( सरसी छंद) - सूरज तिवारी


देश-प्रेम पर जाँ न्योछावर, कर मेरे मनमीत!
जिसके हिय में दया नहीं है, वह क्या जाने प्रीत!

संघर्षों में जीवन बीता, फिर भी करते प्यार,
सरहद पर खड़े जवानों को, वंदन बारम्बार!
देख जवानों की पीड़ा को, लिखना चाहूँ गीत,
जिसके हिय में दया नहीं है, वह क्या जाने प्रीत!

झण्डा ऊँचा रहे हमारा, जिस पर है अभिमान,
सरहद पर सैनिक देता है, हँसते-हँसते जान।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, कह दिल जाते जीत,
जिसके हिय में दया नहीं है, वह क्या जाने प्रीत!

देश-प्रेम सर्वोपरि रखते, ऐसे जग में वीर,
मातृभूमि पर जान लुटा दें, बनें वही गंभीर।
नमन करें उन सेनानी को, गए धरा को जीत,
जिसके हिय में दया नहीं है, वह क्या जाने प्रीत!


— सूरज तिवारी
(भदोही, उत्तर प्रदेश)

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