सर्वोपरि हैं गुरु यहाँ (मुक्तामणि छंद) - दीप नारायण झा 'दीपक'


सर्वोपरि  हैं गुरु यहाँ,दरस  दिखाएँ  सबको।

परम्परा  गुरु -शिष्य की ,वे समझाएँ सबको।


बलिहारी     गुरु  देवता, देवतुल्य  ही  जानें,

गुरु मिल जाते हैं निकट,मन में लाएँ  सबको।


तीन देव  सबसे बड़े, जानें  उनकी  महिमा,

लेकर उनके नाम  को,अब जपवाएँ सबको।


सर्वश्रेष्ठ  गुरु  देवता, प्रथम देव  मातु पिता,

इच्छा  उनकी  हो वही,सफल कराएँ सबको।


दंभ -द्वेष  को छोड़कर,हम मानव बन जाएँ,

मानवता  का भान हो,वही सिखाएँ  सबको।


छोटे- छोटे  फूल  हैं,उपवन में ‌हम खिलते,

खुशबू की माफिक यहाँ,वे महकाएंँ सबको। ‌


दीपनारायण झा'दीपक' 🖋️ बी. देवघर,झारखण्ड


— दीप नारायण झा 'दीपक'

(बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर, झारखंड)

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