भारत के वीर सपूत (देशभक्ति कविता) - डॉ. पुष्पा गुप्ता


हे वीर सपूतों! तुमसे ही,
आज़ाद है यह वतन।
भारत माँ के रणबाँकुरो,
शत-शत तुम्हें नमन!
शत-शत तुम्हें नमन!
भारत की सीमा पर,
जो करते हैं रखवाली।
उनकी माता वीर-प्रसू है,
सचमुच हिम्मत वाली!
तुमसे ही गुलज़ार हुआ,
महक रहा है चमन...
(हे वीर सपूतों! तुमसे ही...)
है जाना तो सबको एक दिन,
पर इन वीरों की शान निराली!
'तेरा साजन वीर पुरुष है',
कहती सिन्दूर की लाली!
खुशहाली है उससे वतन की,
आबाद है घर-आँगन...
(हे वीर सपूतों! तुमसे ही...)
तेरी यश-गाथा सुनकर,
बच्चों में होश भरे।
मातृभूमि की रक्षा हेतु,
तन-मन में जोश बढ़े!
बच्चों की मुस्कान तुम्हीं से,
तुमसे ही बचपन...
(हे वीर सपूतों! तुमसे ही...)
जब भी लेते हैं वीर जवान,
कसम तिरंगे की!
कभी न आए आँच देश पर,
ठानी मर मिटने की!
देश की ख़ातिर ओढ़ लिया,
तिरंगे का कफ़न...
हे वीर सपूतों! तुमसे ही,
आज़ाद है यह वतन।
भारत माँ के रणबाँकुरो,
शत-शत तुम्हें नमन!


— डॉ. पुष्पा गुप्ता
(लीचीपुरम - मुजफ्फरपुर, बिहार)


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