मीले नs अएलन हो संइआ (बज्जिका लोक गीत)— ई. राणा ब्रजेश


​पीपर के छंइआ में जे संइआ जी बोलएलन,

मीले नs अएलन हो, मीले नs अएलन।

पीपर के......।

​डंहुरी पर कोयल जे कुहू-कुहू बोले,

मनबा हमर संङ-संङ ओकरे डोले,

कोनो पेहानी नs मन रमकएलन,

मीले नs अएलन हो, मीले नs अएलन।

पीपर के......।

​रग्गर पर लग्गल पुरबइआ अभगली,

खुशबू पिआ के आएल हम समझली,

छन में हजार बेर मन हमर मुसकएलन,

मीले नs अएलन हो, मीले नs अएलन।

पीपर के......।

​रस्ते में होतन साइत सनेसे में बझ्झल,

अनारी अनाठू न जाने कोनो भग्गल,

मन तरसएलन आ अँखिआ गरएलन,

मीले नs अएलन हो, मीले नs अएलन।

पीपर के......।

​भे गेल अबेर लोग संसय से देखे,

कारन बेकारन उलंङ जाल फेकें,

हम्मर बदनामी बेकारे करएलन,

मीले नs अएलन हो, मीले नs अएलन।

पीपर के......।

​पुछबन बिहान जब मीले ले अएतन,

मानबन न बात कहां सांस लेबे जएतन,

आस बिसबास के डोरी थमएलन,

मीले नs अएलन हो, मीले नs अएलन।

पीपर के......।


— ई. राणा ब्रजेश

    दरभंगा , बिहार 



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