चश्मदीद गवाह था,
या कोई हवा थी?
किसने देखा था—
हत्या, अत्याचार,
प्रदर्शन, आकर्षण,
आंदोलन को गति देती
युवाओं की टोली,
जिसके मुँह पर एक थी बोली—
"मुझे शिक्षा चाहिए,
मुझे इंसाफ़ चाहिए,
इंसाफ़ में मेरा भविष्य चाहिए!"
आंदोलन बंद हो गया,
सब अपने घर लौट गए,
पर न लौट सकीं
कई जानें,
जिनकी बलि पर
बचा उनका राज्यारोहण!
क्या अब नहीं होगा
पेपर लीक?
— अबरार टिकारवी
(टिकारी, गया)
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छंदमुक्त