कितना दिलकश हसीं नजारा है,
साथ जब से मिला तुम्हारा है।
ज़िक्र होता कहीं तुम्हारा है,
धक् से रह जाता दिल हमारा है।
जिंदगी अपनी ऐसी कटती है,
जैसे टूटा हुआ सितारा है।
किससे जाकर सुनाएँ हाल-ए-दिल,
कोई भी तो नहीं हमारा है।
डूब जाएँ भी तो मलाल नहीं,
सबको मिलता कहाँ किनारा है।
हर किसी से मिलो मुहब्बत से,
ज़िस्त मिलती नहीं दुबारा है।
कोई शिकवा नहीं मुक़द्दर से,
जो मिले सब हमें ग्वारा है।
कोई तो बात है तुम में जानाँ,
यूँ ही तो दिल नहीं तुम्हारा है।
इक तुम्हारे सिवा नहीं कोई,
दिल ने हर पल तुम्हें पुकारा है।
छोड़ भी दे लता जहाँ का ग़म,
जब ख़ुदा से मिला सहारा है।
— रंजना लता
(समस्तीपुर, बिहार)
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