ब्रह्म मुहूर्त (कविता) - त्रिपुरारी कुमार पाण्डेय

क्यों लोगों के हृदय-स्थल में ब्रह्म मुहूर्त का वर है!
योगी-जन का यह आधार है, गृहस्थों का घर है।

यह बेला है जब अंगड़ाई लेती प्रकृति-रानी,
कवियों की तेज-शक्ति है, लिखते रहे कहानी।

आत्माओं का योग-मिलन है, प्रणय-काल की वेला,
कुछ आत्माएं घूमतीं फिरतीं, थक के इधर अकेला।

यही समय है जहाँ पे योगी करते ध्यानारंभ,
यह अत्यंत सुखद समय है, शुभ मुहूर्त प्रारंभ।


— त्रिपुरारी कुमार पाण्डेय 

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