हिंदी है पहचान हिंद की,
माँ समान इसको मानें।
हम सब मिलकर सम्मान करें,
अपनी माँ को पहचानें।
सहज, सरल, प्यारी हिंदी ही,
मन की बात बताती है।
भारतवासी के मन में यह,
हरदम जोश जगाती है।
भारत माता की है बिंदी,
स्वाभिमान को भरती है।
बनी भारत की राजभाषा,
कब राष्ट्रभाषा बनती है?
संस्कारों की वाहक हिंदी,
संस्कृतियों की जननी है।
हिंदी से ही मान देश का,
दिल-दिमाग में भरनी है।
— डॉ. सतीश चन्द्र भगत
बनौली, दरभंगा (बिहार)