हमारी आन है हिंदी,
हमारी शान है हिंदी।
हमारे हिंद की असली,
यही पहचान है हिंदी॥
यह हिंदी देवभाषा है,
यह अमरों की मधुर वाणी।
हृदय की भावना इसमें,
यह भाषाओं की है रानी।
विविध पुष्पों से सुरभित,
पल्लवित उद्यान है हिंदी॥
मिला है सत्य का संबल,
इसे बलिदान का बल है।
तपन का तेज है इसमें,
कि इसका रूप निर्मल है।
मनुज के सद्गुणों का,
शीर्षतम उत्थान है हिंदी!
यह हिंदी जोड़ती दिल को,
मनुज को पास लाती है।
हृदय में प्रेम-श्रद्धा का,
मधुर दीपक जलाती है।
हृदय के सेतु का नूतन,
नवल निर्माण है हिंदी॥
यह हिंदी है महादेवी,
यहाँ साक्षात जयशंकर।
सुभद्रा है, भवानी है,
मिला इसको प्रखर दिनकर।
कभी मीरा, कभी तुलसी,
कभी रसखान है हिंदी॥
यहाँ तुलसी का मानस है,
यहाँ है सूर का सागर।
निराला रूप है इसका,
भरा है प्रेम का गागर।
मनुज-मन का सहज ही,
सूक्ष्म अनुसंधान है हिंदी॥
शमित त्रय-ताप करती है,
बुझाती द्वेष की ज्वाला।
सदा परिताप हरती है,
हृदय के प्रेम का पावन,
प्रबल अभियान है हिंदी!
बढ़ाएँ मान हम इसका,
इसे सब लोग अपनाएँ।
करें सब काम हिंदी में,
सहज सुख-शांति हम पाएँ।
प्रगति का मंत्र है यह,
सृष्टि का वरदान है हिंदी!
— अर्जुन प्रभात