गलत पता रहल, त का करितीं? (कविता) - सिद्धेश्वर

कुछ कहे के रहल, त का करितीं?
होठ सियल रहल, त का करितीं?

तोहरे बचन से घाव लागल,
अँसुअन ना पीतित, त का करितीं?

झूठ कहे के आदत ना रहे,
चुप रहला में भल, त का करितीं?

ओके तोड़त-तोड़त खुद टूट गइनी,
अब अउर सहितीं, त का करितीं?

तोहरा लगे पहुँच ना पवनी,
गलत पता रहल, त का करितीं?

याद में तू जब आवे ना,
भुला ना देतित, त का करितीं?

ई दुनिया भी अजब ह ‘सिद्धेश’,
ज़हर पियवले, त का करितीं?


— सिद्धेश्वर
पटना, बिहार 

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