कुछ कहे के रहल, त का करितीं?
होठ सियल रहल, त का करितीं?
तोहरे बचन से घाव लागल,
अँसुअन ना पीतित, त का करितीं?
झूठ कहे के आदत ना रहे,
चुप रहला में भल, त का करितीं?
ओके तोड़त-तोड़त खुद टूट गइनी,
अब अउर सहितीं, त का करितीं?
तोहरा लगे पहुँच ना पवनी,
गलत पता रहल, त का करितीं?
याद में तू जब आवे ना,
भुला ना देतित, त का करितीं?
ई दुनिया भी अजब ह ‘सिद्धेश’,
ज़हर पियवले, त का करितीं?
— सिद्धेश्वर