नशा निषेध (कविता) - डॉ. पुष्पा गुप्ता

नशाखोरी बुरी लत है,
इससे आती विपत है।
हो सके जितना जल्दी,
इसे रोक दो मेरे भाई!
है इस पर निषेध लगा,
कब समझोगे इसे सभी?
है बुरा छुप-छुपकर पीना,
इससे जल जाता है सीना।
नशा करोगे, घर टूटेंगे,
रिश्ते-नाते सब छूटेंगे।
बदहाली तब आएगी,
मौत भी गले लगाएगी।
घर में कलह छा जाएगा,
पीकर पीछे पछताएगा।
ऐसा ज़हर पीएँ ही क्यों?
जीते-जी मरें ही क्यों?


- डॉ. पुष्पा गुप्ता
लीचीपुरम - मुजफ्फरपुर, बिहार

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