चाँद से मिल रही चाँदनी प्यार में,
मिल रहे दो यहाँ अजनबी प्यार में।
सहर भी अजनबी, शाम भी अजनबी,
चार सू हो रही दिल्लगी प्यार में।
आओ फैलाएँ हम प्यार की रोशनी,
बढ़ न जाए कहीं तीरगी प्यार में।
बेक़रारी में है हर कली देखिए,
हो रही है जवाँ आशिक़ी प्यार में।
हर गली, हर मुहल्ले में चर्चा यही,
ख़ूब रुस्वा हुई सांवरी प्यार में।
देखो छेड़ो नहीं मेरे जज़्बात को,
वरना हो जाऊँगी बावरी प्यार में।
— आराधना प्रसाद
(शायरा, पटना)
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