पूरे जंगल में एक हवा चली
सोंधी, शीतल और शांत
एक झोंका लताओं को लगा
लताओं ने फूलों को बिछा दिया
गाँव से पश्चिम जा रहे रास्ते पर
झूमती-लटकती डालियों ने
सुगंध को अपने आँगन में देखा
हवाओं के साथ फैलते हुए गाँव में
बरगद के पार दूर नगरों में
फैल गई एक सुगंधित बयार
पूरी धरती ने एक हरे रंग की चादर ओढ़ ली
झरोखे से सूरज की किरणों ने सुनहरी अंगीठी जलाई
सब झूम रहे थे, मचल रहे थे
शायद किसी ने सावन की आहट सुनी थी
उमड़ते-घुमड़ते मँडराते बादलों ने पूरे नगर में शोर मचा दिया!
वह आ रहा है झूमते-गाते, मचलते, पूरब के पीपल को हिलाते-डुलाते...
— विकास वर्धन
बिहार
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