तू कर सके तो कुछ यहाँ बेहतर तलाश कर (ग़ज़ल) - मनीषा सहाय सुमन


तू कर सके तो कुछ यहाँ बेहतर तलाश कर,
हद से गुज़र के अपने कुछ अंदर तलाश कर।

किस्मत पे रोने वालों को मिलता भी कुछ नहीं,
हिम्मत बढ़ा के अब नया मंज़र तलाश कर।

सहमे हुए किनारे से मिलती नहीं है लहर,
गहराइयों में एक समंदर तलाश कर।

आँखों में जो सजे हैं वो सपने पुकारते,
सपनों को छोड़ फिर कोई मुक़द्दर तलाश कर।

ये मंज़िलों के रास्ते ख़ुद ही बनेंगे दोस्त,
बस तू जुनून-ए-इश्क़ का रहबर तलाश कर।

मेहनत ही तेरी जीत का परचम लहराएगी,
ज़ंजीरें तोड़ अपनी नया घर तलाश कर।

जो कह रही कहानी वो अब बेवजह सही,
कुछ हौसलों से अपने वो दर-दर तलाश कर।


— मनीषा सहाय सुमन
    झारखंड


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