बड़ा सोहनगर, गुनगर,मनगर,
बज्जिका मीठ बतासा हए।
कोटि - कोटि बज्जि जन के,
जुग से मातृभासा हए।
अति ओजनगर,भओगर, रसगर,
एक्कर शब्द खजाना हए।
लोकगीत आ लोकोक्ति के,
नs कोई ओर ठेकाना हए।
एमे जुमला अओर पट्टुत्तर,
दसकूटक बहु नाना हए।
संस्कार के मधुर गीत के,
युग से जगत दीवाना हए।
कवित, कहानी,शब्दकोस आ,
एक्कर भासा शास्त्र विधान।
हरेक विधा में सिरजन के संग,
अरुण रमायण एक्कर शान।
सीता अम्बा महावीर के,
रीत-कला गुन खानी ई।
मैथिल,मगही, भोजपुरी,
आदि बोलिअन के नानी ई।
आले-आले बज्जिका हम्मर,
लक्ष्य राह पर बढ़ रहल हए।
नया-नया पोथी से नित-नित,
एकर खजाना भर रहल हए।
उर में एक संकल्प, कलम कर,
हम एक्कर गओरव लउटाएम।
हम बज्जिका के,हम्मर बज्जिका,
हम बज्जिका के मान बढ़ाएम।