बिछुड़न के बाद भी जो रह गई... (छंदमुक्त) - सोनी कुमारी


कुछ रिश्ते बिछड़कर भी
रह जाते हैं इस तरह—
जैसे, सूरज डूबने के बाद भी
देर तक आस्मां में लाली बिखरी रहती है।
जैसे, बारिश थम जाने पर भी
पत्तियों और शाखों पर उदास बूँदें बेबस झूलती हैं।
जैसे, दीवार से तस्वीर हटाने पर भी
एक गहरा अनमिट निशान रह जाता है।
जैसे, मेहंदी धुल जाने पर भी
हथेली पर अपनी सुर्ख रंगत छोड़ जाती है।
बिछड़ कर भी कुछ रिश्ते
रह जाते हैं सीने में इस तरह—
जैसे, धड़कनें रुक जाने पर भी
जिस्म में कोई गूँज बाकी रह जाती है!
— डॉ. कुमारी सोनी 'सोनिया अनंत'

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