युवा कहाँ जा रहा है?​— डौली कुमारी (दरभंगा)


युवा देश का कहाँ जा रहा,
क्या जा रहा किसी गर्त में?
मुँह में गुटका, हाथ में सिगरेट,
जैसे रहता है किसी दर्द में!
सोशल मीडिया की गिरफ्त,
उस पर बोझ अकेलापन।
ज्ञान रील से ले-लेकर,
स्थिर नहीं है इनका मन।
'यह करूँगा, वह करूँगा',
में कुछ ये करते नहीं।
कर देते हैं आत्मसमर्पण,
हालातों से लड़ते नहीं।
कहीं तो हम हैं चूक रहे,
कमी है कुछ तो फ़र्ज़ में।
मुँह में गुटका, हाथ में सिगरेट,
जैसे रहता है किसी दर्द में!
रात-रात भर फ़ोन चलाएँ,
दिन में सोएँ चद्दर तान।
करते सारी हरकतें भी,
ये निशाचर के समान।
तनिक नहीं है धैर्य भी इनमें,
ये खुद को भूल रहे हैं क्यों?
आकर लाइव इंटरनेट पर,
पंखे से झूल रहे हैं क्यों?
ढूँढ़नी होंगी कुछ दवाइयाँ,
जो काम करें इस मर्स में।
मुँह में गुटका, हाथ में सिगरेट,
जैसे रहता हो किसी दर्द में!
उठो देश के नौजवानों!
कुछ तो देश की खातिर कर।
वीरों का वंशज है तू,
उठ चौड़ी अपनी छाती कर।
आपदा में ढूँढ़ा अवसर तो,
एक युवा पूज्य श्रीराम हुए।
एक लड़के ने ठाना और,
पढ़-लिख अब्दुल कलाम हुए।
बचपन तेरा बीत गया,
क्यों बीते जवानी कज़्र में?
मुँह में गुटका, हाथ में सिगरेट,
जैसे रहता है किसी दर्द में!
युवा देश का कहाँ जा रहा,
क्या जा रहा किसी गर्त में?
मुँह में गुटका, हाथ में सिगरेट,
जैसे रहता है किसी दर्द में!
जैसे रहता है किसी दर्द में!

—डौली कुमारी 
शिक्षिका, दरभंगा





1 टिप्पणियाँ

  1. आज के युवावर्ग का यथार्थ वर्णन
    आज ज़रूरत है हमें उन पुराने लोगों से प्रेरणा लेने की जिन्होंने अपने समाज और देश के लिए क्या कुछ नहीं किया
    बहुत सुंदर रचना 👏

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