समीक्षक: हरिनारायण सिंह 'हरि'
'राजमहल की अंतिम रात' युवा और उत्साही कवयित्री, अभिनेत्री और नाटककार प्रीति सुमन की छह दृश्यों वाली एक लघु नाटिका है। नाटककार प्रीति सुमन ने मात्र तीन पात्रों—अयोध्या की महारानी सीता, उनकी मायके से साथ आई सखी-दासी रक्षिता और लक्ष्मण की बेटी राजकुमारी सोमदा के सहारे 'राजमहल की अंतिम रात' नाटिका का ताना-बाना बुना है।
कथा अयोध्या के महाराज राम की धर्मपत्नी महारानी सीता पर अयोध्या के एक धोबी (एक साधारण प्रजा) के द्वारा चरित्र-हीनता का आरोप लगाना और एक साधारण से साधारण प्रजा की भी सुनने वाले राम के द्वारा सीता का त्याग और उनका वन-गमन भर है। किन्तु, आम प्रचलन की तरह इस कथा को प्रीति सुमन ने सिर्फ एक नारी की दृष्टि से नहीं देखा है, बल्कि उन्होंने इसे कर्त्तव्य से विवश एक पुरुष की दृष्टि से भी देखा है। प्रीति सुमन ने राजधर्म की विवशता को भी समझा है, इसलिए इस नाटिका को सिर्फ स्त्री विमर्श की दृष्टि से नहीं देखा जा सकता।
नाटककार ने स्त्री और पुरुष यानी सीता और राम के अन्तर्मन में भी प्रवेश करने का सफल प्रयास किया है। बूढ़ी दासी और सोमदा के माध्यम से कथा को 'फ्लैशबैक' के जरिए नाट्य-प्रस्तुति के लिए ढला गया है। प्रथम दृश्य से लेकर अंतिम दृश्य तक नाटिका में नाटककार के स्नेही और करुणा से लबालब हृदय को शब्दों के माध्यम से मुखरित किया गया है। छोटे-छोटे वाक्य नाटिका को प्रवाह देते हैं, उसकी नाटकीयता को गति प्रदान करते हैं और उसे सिर्फ नाट्य ही नहीं, बल्कि पाठ्य भी बनाते हैं।
मुझे लगता है युवा नाटककार ने संस्कृत नाटकों को भी अवश्य पढ़ा होगा या उनके बारे में अपने बुजुर्गों से अवश्य सुना होगा, तभी तो महारानी सीता और राजकुमारी सोमदा के कथोपकथन के लिए प्रयुक्त हिन्दी परिष्कृत हिन्दी है, तो दासी (सखी) के लिए प्रयुक्त हिन्दी से गँवई हिन्दी की खुशबू आती है, जो नाटिका को भाषा की दृष्टि से सहज और ग्राह्य बनाती है। यही इसकी सफलता है।
इस नाटिका को पढ़कर मैं इतना तो अवश्य ही कह सकता हूँ कि प्रीति एक संभावनाशील नाटककार हैं। यह नाट्य-पुस्तक नाट्य-लेखन के क्षेत्र में इनका प्रस्थान-बिन्दु है, आगे तो खुला और विस्तृत आकाश है। यह पाखी के पंखों पर निर्भर करता है कि वह भविष्य में कितनी ऊँची उड़ान भर सकती है। मेरी शुभकामना है कि वह ऊँची-से-ऊँची उड़ान भरें, लेकिन इसके लिए साधना करने की भी आवश्यकता है, मात्र नाटक की एक पुस्तक के प्रकाशन और सफलता से संतुष्ट हो जाने की नहीं।
इति शुभम्!
समीक्षक: हरिनारायण सिंह 'हरि'
समस्तीपुर, 13/04/2026
📘 पुस्तक का विवरण (Book Details):
पुस्तक का नाम: 'अतिथि देवो भवः' एवं 'राजमहल की अंतिम रात'
नाटककार: प्रीति सुमन
प्रकाशक: विद्या विहार, नई दिल्ली
प्रकाशन वर्ष: 2025
मूल्य: ₹250