शुभ हो जीवितपुत्रिका (कविता) - अर्जुन प्रभात

शुभ हो जीवितपुत्रिका, सुखी रहे संतान।
जननी के मन का यही, एकमात्र अरमान॥

माँ ममता का कोश है, क्षमा-दया की खान।
सतत त्याग से कर रही, जीवन का निर्माण॥

माँ के जैसा जगत में, त्याग करेगा कौन?
सहती सारी आपदा, फिर भी रहती मौन॥

ईश्वर को देखा नहीं, धरती पर साकार।
सभी जीव महसूसते, केवल माँ का प्यार॥

सब माताओं को करे, अर्जुन आज प्रणाम।
जो अपनी संतान हित, कर्म करें निष्काम॥


— अर्जुन प्रभात

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