जितिया का पावन पर्व, लाया खुशियों की बहार,
ममता की छाँव में पलता, माँ का सारा संसार।
संतानों की सुख-समृद्धि को, माँ करती उपवास,
मन में लेकर प्रेम-प्रार्थना, रखती अटूट विश्वास।
दूर्वा, धागा, फूल सजाकर, पूजे विधि-विधान,
माँ के व्रत की शक्ति से, सुखी रहे संतान।
जितिया पर्व सिखाता हमको, ममता सबसे महान,
माँ के आँचल में सदा, मुस्काए हर संतान।
— अनीता सिद्धि