पावन महीना सावन(कविता) - राजेंद्र सहनी

सावन आया, गगन में बादल छाया,
चारों तरफ़ मेघ बरसाया।
सुवास वर्षा के पवन में लाया,
सबके मन को सावन भाया।

सावन वर्ष का पावन मास है,
भक्ति का महीना भी ख़ास है।
नटवर का नाद है सावन,
भक्तों की साधना का मास है सावन।

सावन है खेती-बारी का प्राण,
मेंढक-झींगुर की सुनाई देती है तान।
खेतों में फ़सलें लहराती हैं सीना तान,
किसान हर्षित है खेती अच्छी जान।

बागों में झूले लग गए,
नवयौवना उमंग से भर गई।
पिया परदेसी सावन में आने को कह गए,
पिया परदेसी अब तक न आए,
रह-रहकर हे सखी! पिया की याद सताए,
मधुर मिलन का मास यूँ ही बीतता जाए।

रक्षाबंधन का मास है सावन,
भाई-बहनों का ख़ास मास है सावन।
बहनों की रक्षा का बोध कराता है रक्षाबंधन,
भाई-बहन के प्रेम का पर्व है सावन।

- राजेंद्र सहनी
सीतामढ़ी, बिहार 

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