चलो हम आज अपने ही घरों की बात करते हैं (ग़ज़ल) - डॉ. किशन तिवारी

चलो हम आज अपने ही घरों की बात करते हैं 

छिपे हैं जो दिलों में उन डरों की बात करते हैं।


तुम्हारे खूबसूरत से बदन पर ख़ूब सजती है 

अभी साड़ी नहीं हम बुनकरों की बात करते हैं ।


हमारा हक़ था जिन चीजों पे ग़ायब हो गई कैसे 

नये इस दौर के बाज़ीगरों की बात करते हैं ।


यहाँ सब कुछ बिकाऊ है धरम ईमान इज़्ज़त भी 

चलो हम मुल्क के सौदागरों की बात करते हैं 


बहुत ही खूबसूरत आज ये दुनिया नज़र आई

बनाई जिसने उन कारीगरों की बात करते हैं 


अभी कुछ लोग ऐसे हैं ज़माने से नहीं डरते 

किशन हम आज ऐसे शायरों की बात करते हैं 



- डॉ. किशन तिवारी 
भोपाल 



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