भारत हम्मर देश गुमान करबे करब,
केहनो चाहे भेस गुमान करबे करब।
एक तरफ गुरवाणी गूँजे दोसर तरफ नबाह,
तेसर गूँज अजान के सुनू चओथा गौड प्रवाह,
मंदिर मसजिद गुरदार गिरजाघर जहाँ समान,
सर्व धरम समभाव साथे बुद्ध हिन्द हिन्दुस्तान।
चुमान करबे करब,
भारत हम्मर देश गुमान करबे करब।
एक पर एक वीर - वीरांगना से भरल घरबार,
साधु - संत आ पीर महतमा सेहो जगजिआर,
देशप्रेम आ माटी के लेल जनमल इहाँ के लाल,
आँख देखाबे बाला के लेल बुतरू बुतरू काल।
सुजान करबे करब,
भारत हम्मर देश गुमान करबे करब।
नेह-छोह आ कुटुम के आबोभगत इहाँ के रीत,
डाह के उत्तर दया दरेग से सांचो में पर प्रीत,
दान-पुन तेआग के गाथा जाने सगर जहान,
धरती के श्रृंगार करइअ भारत भुमि महान।
धेआन करबे करब,
भारत हम्मर देश गुमान करबे करब।
जहाँ तिरंगा आन बान आ शान से फहरइअ,
बलिदानी अभिमानी इहां घरे-घरे सोहरइअ,
पहरेदार हिमालय एक्कर उत्तर में तइआर,
दक्खिन में सागर जग्गल देइत हए फोफकार।
जुटान करबे करब,
भारत हम्मर देश गुमान करबे करब।
रंङ - बिरंङ के खान पान एक मगर हए मन,
बहुरंगी बोली -भासा एक मगर हए सब जन,
जब जब देश पर बिपत परल जान नेछावर भेल,
इहे इहां के मुक्ख धरम हए मानवता के लेल।
बिहान करबे करब,
भारत हम्मर देश गुमान करबे करब।
ई . राणा ब्रजेश
दरभंगा, बिहार