क्या है गुनाह यार, बताया न जाएगा,
तू साँस में बसा है, भुलाया न जाएगा।
तेरा कसूर कुछ नहीं, फिर भी यह सोचकर,
तुझसे किया था वादा, बताया न जाएगा।
हम पिंजरे को खोल परिंदे उड़ा रहे,
बंधक किसी को भी अब बनाया न जाएगा।
खाई कसम थी संग जो जीने की, ऐ ख़ुदा!
तस्वीर को गले भी लगाया न जाएगा।
मेरे रक़ीब! तू ही बता तुझसे क्या कहूँ,
अब बोझ ज़िंदगी का उठाया न जाएगा।
— सूरज तिवारी
(भदोही, उत्तर प्रदेश)