नाग पंचमी ( कविता) - ममता तिवारी 'मृदुला '


सावन शुक्ल पक्ष पंचमी को,
हम गर्वित पर्व मनाते हैं।
धर्म सनातन प्रकृति-पोषित,
साँपों को दूध पिलाते हैं।

दया भाव से भरा अतुलनीय,
नाग पंचमी पर्व पुराना।
पौराणिक जाँचा-परखा यह,
ध्येय रहा जीव-जंतु बचाना।

सदा रहे पूर्वज हमारे,
ज्ञान-ध्यान में, नहि विद्वेषी।
पर्व बनाए हैं उन्होंने,
प्रकृति-जीव-जंतु हितैषी।

फैलाया भ्रम-मिथ्या जिसने,
भारत बारे में, धिक्कारो।
देश सपेरों, इंद्रजाल का,
बात कभी न इसे स्वीकारो।

जलमग्न सकल भूमि वर्षा में,
भू भीतर तक आप्लावित हो।
तल बिल बांबी कीट जीव जगत,
आते ऊपर भय-भावित हो।

- ममता तिवारी ' मृदुला ' 
       छत्तीसगढ़ 



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