साथ जीना है तो चलिए यूॅं ही साया बनकर
उम्र भर रहना मेरी ऑंख का तारा बनकर
जो अज़ीज़ों से घिरे रहते हैं वो क्या जाने
लोग तन्हाई में रह जाते हैं मुर्दा बन कर
अपनी पहचान बनानी है ज़माने में मगर
डर है रह जाएँ कहीं हम न तमाशा बनकर
प्यार करते हो तो वादा भी ये करना होगा
आप ता-उम्र रहोगे यूँ हमारा बनकर
मिल नहीं पाती है इज़्ज़त कभी थोड़ी उसको
जो भी जीता है यहॉं सस्ता सा सौदा बनकर
रहनुमाई जो किया झूठ का, तमगा पाया
हम तो बदनाम हुए शहर में सच्चा बनकर
अब तो महफूज़ बहुत खुद को समझती हूँ मैं
आप रहने जो लगे साथ में साया बनकर
इस ज़माने की नहीं अब कोई परवाह मुझे
थाम रक्खे हो मुझे आप सहारा बनकर
'साधना 'वक्त की रफ्तार नहीं कम होती
ख़ैरियत इसमें है चल वक्त का हिस्सा बनकर
- साधना कृष्ण
हाजीपुर, बिहार