जिसमें केवल बसती श्रद्धा,
रहता निर्मल प्यार।
भाई और बहन का पावन,
यह राखी-त्योहार।
हो भाई चाहे कहीं भी,
बहनों के घर आते।
अपने हाथ बढ़ा बहनों से,
हैं राखी बंधवाते।
यह न केवल एक धागा है,
इसमें है विश्वास।
भाई उसका सच्चा रक्षक,
जगी है उससे आस।
भैया का उपहार भी होता,
इस दिन आशीर्वाद।
जिसको वर्षों तक रखती हैं,
सारी बहनें याद।
- डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफ़री
बेगूसराय, बिहार