जाने क्यों, सभी डरा रहे हैं मुझे,
जिया में धुकधुकी सी मची है।
बत्ती भी गुल है,
बोतल से मिट्टी तेल का बनाया भम्भा,
भक-भक कर जल रहा है।
साँय-साँय करता पवन,
हड़बड़ाता-सा आकर,
कभी भड़भड़ाता,
कभी हड़काता है,...
एक झलकी एक,
झक्की सावन का।
झाँय-झाँय झोर-झोर कर,
पानी बरसता है,
झींगुर भी चिल्लाता है।
उधर अधलगा टप्पर झल्ला कर,
झन्न से गिर जाता है।
मैं झल्ली सी झक मारे,
कभी इधर, कभी उधर,...
संझा के सात बजे,
जैसे अमावस की,
अधरतिया हो,
घुप अंधियारी।
टर्र-टर्र की आवाज़,
केंचुआ की झीं-झीं-झीं।
घटा ऊपर घटा, घटा ऊपर घटा,
एक की पूँछ एक पकड़े चूहों की,
की बारात।
लद्दी में लटपटाया कुकुर,...
ओसारे में टँगी टूटी खटिया,
और गंठियाया झूलता रस्सा,
जैसे टोटका किया हो कोई।
ढुलमुल होती डेकची,
कोई मटिया, कोई टोनही,
या कोई भूतनी,
हवा बन हिला रही है।
सन्न हाथ-पाँव,
भिन्नाया खोपड़ी,...
उफ़्फ़! आह! ओह्ह! इश्श...
भागो सब!
चलो, शुभ सोचते हैं,
मृदु, शुचि, सुरुचि, सरल सौम्य सुलभ, शालीन, शिष्ट, शोभित,
शांत, शीतल सरस, सुमधुर, सुहाना और साहित्यिक...
कुछ ऐसा... कि...
मोहब्बत बरसा देना तू, सावन आया है,
रिमझिम-रिमझिम, रुनझुन-रुनझुन,
भीगे-भीगे रुत में हम-तुम, तुम-हम,
चलते हैं, चलते हैं।
- ममता तिवारी 'मृदुला'
100 से अधिक साझा संकलनों में सहभागिता।
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रतिदिन रचनाओं का प्रकाशन।
एकल प्रकाशित काव्य-संग्रह
1- वीरानों के बागबाँ
2- साँस-साँस पर पहरे
3- अंजुरी भर समुंदर
4- कलयुग (खण्डकाव्य)
5- शेफालिका
6- निशिगंधा
7- नील-नलीनी (काव्यकथा)
8- अमर लता (गीत-संग्रह)
9- पुस्तक मेरा मित्र
10- पिघलता आईना (गद्य-संग्रह)
11- आँसू (जयशंकर प्रसाद की कृति) का छत्तीसगढ़ी बोली में अनुवाद
12- बशर सहमा हुआ सा है (ग़ज़ल-संग्रह)
13- हर दिन नई उड़ान (मुक्तक-संग्रह)
14- मील के पथना (छत्तीसगढ़ी कविता-संग्रह) — प्रकाशनाधीन
15- पांचाली (महाकाव्य / काव्य-उपन्यास) — सृजनशील
-सम्मान एवं उपलब्धियाँ
विभिन्न संस्थाओं, संस्थानों एवं साहित्यिक समूह-पटलों से चार सौ से अधिक प्रशस्ति-पत्र, प्रशंसा-पत्र एवं प्रमाण-पत्र प्राप्त।
एक कविता पर एशिया रिकॉर्ड धारक।
रॉयल्टी प्राप्त कवयित्री।
विक्रमशिला विश्वविद्यालय से मानद ‘विद्या वाचस्पति’ सम्मान प्राप्त।
वर्तमान निवास – जांजगीर-चाम्पा (छत्तीसगढ़)