नारद जी ब्रह्मांड के प्रथम पत्रकार थे। कहीं भी, कभी भी प्रकट हो जाने की उनको विशेष छूट थी। जहाँ काम बना-बनाया हो, वहाँ जाकर बिगाड़ देते थे और जहाँ किसी भी तरह से न बन रहा हो, वहाँ जाकर एक रास्ता सुझा देते थे।
आजकल काम बहुत बढ़ गया है, तो उन्होंने भी आउटसोर्सिंग शुरू कर दी है। मैं भी उनके लिए पार्ट-टाइम काम कर लेता हूँ।
कल 30 जून थी। पहली जुलाई को सभी छोटे-बड़े स्कूल खुल जाते हैं, तो नए सत्र में स्कूल शिक्षिकाओं की 'व्यथा-कथा' से अवगत कराने का दायित्व मुझे मिला था। पेश है मेरी आँखों देखी, कानों सुनी कुछ झाँकियाँ।
1- एक ग्रामीण स्कूल में नियुक्त शिक्षिका
"फिर से वही इसकूल, वही गाँव के लरिका, परधान के चमचन से दुआ-सलामी, मिड-डे मील की झिकझिक, सबेरे-सबेरे नहाए-धोए के टेम्पो में ठूँसमठूँस! न लरिका पढ़ैं, न पढ़ाने में जिउ लागै।"
2- एक नवविवाहिता की ससुराल का दृश्य
"अरे छुटकी! देख ज़रा तेरी भाभी अभी तैयार हुई कि नहीं? आज से स्कूल खुल रहा है।"
"प्रणाम माँ जी, मैं बिलकुल तैयार हूँ।"
"अरे बहू! यह तूने लेगिंग-कुर्ती क्यों पहन रखी है?"
"माँ जी, मैं तो हमेशा ऐसी ही ड्रेस में स्कूल पढ़ाने जाती थी।"
"जाती थी ना! अब नहीं जाएगी। ससुराल से तो साड़ी पहनकर ही जाना होगा। चार लोग देखेंगे तो क्या कहेंगे?"
3- मैटरनिटी लीव के बाद लौटने वाली शहरी युवती
"हेलो! हाँ बोलो, क्या हुआ?"
"अरे, मुन्ना कब से रो रहा है, तुमको अभी कितनी देर लगेगी?"
"आज पार्लर में भीड़ बहुत है। कल स्कूल खुल रहे हैं, इसलिए सभी मैडम लोग पार्लर आई हैं। एक घंटा लग सकता है।"
"मगर मुन्ना तो चुप ही नहीं हो रहा है, क्या करूँ?"
"उसकी बोतल में दूध गुनगुना करके भर दो और पिला दो।"
"मुन्ना दूध नहीं पी रहा है, रोता ही जा रहा है।"
"तो सुनो, उसका डायपर बदलना होगा। नया डायपर पहना दो।"
"मुझे डायपर बदलना नहीं आता।"
"कब से कह रही थी कि मुन्ने का डायपर बदलना सीख लो, मगर तुम तो मर्द थे ना, इसलिए डायपर को हाथ लगाना तुम्हें पसंद ही नहीं था। अब भुगतो! मुन्ना तो रोज़ तुम्हारे पास ही रहेगा, मैं उसे स्कूल तो लेकर जाऊँगी नहीं। आखिर कब सीखोगे यह सब?"
4- एक युवती, जिसकी सगाई हो चुकी है
"हेलो! मैं तुम्हें स्कूल छोड़ने के लिए आ जाऊँ?"
"नहीं, मैं जैसे पहले जाती थी, वैसे ही चली जाऊँगी।"
"मगर पहले तो तुम किसी लड़के के साथ जाती थी?"
"हाँ तो क्या हुआ, अब भी उसी लड़के के साथ चली जाऊँगी।"
"नहीं, अब तुम उसके साथ नहीं जाओगी। उसकी बाइक की पिछली सीट कितनी ऊँची है! तुम उसकी पीठ के सहारे बैठती होगी, यह मुझे अच्छा नहीं लगता।"
"पर मैं तो पहले भी उसके साथ इसी तरह से बैठकर जाती थी।"
"हाँ, लेकिन अब हमारी सगाई हो चुकी है।"
"तो क्या हुआ, उसकी भी तो इसी जून में शादी हो गई है।"
"हाँ, लेकिन फिर भी..."
"फिर भी क्या? उसे तो कोई एतराज़ नहीं है, और मेरा स्कूटी का पेट्रोल भी बचता है।"
"इसका क्या मतलब है? कल को तुम्हारी शादी मेरे साथ होने जा रही है।"
"ओह! बी प्रैक्टिकल यार, अब वह ज़माना नहीं रहा। अगर फिर भी तुमको एतराज़ है, तो मैं पापा को बोल दूँगी कि मुझे यह शादी नहीं करनी।"
5- एक वरिष्ठ शिक्षिका का गृहस्थ संसार
"अजी सुनते हो!"
"बीस साल से सिर्फ़ सुन ही तो रहा हूँ।"
"ज़रा जल्दी से मेरी स्कूटी में पेट्रोल फुल करा लाओ। आठ बज रहे हैं, पेट्रोल पंप बंद हो जाएगा।"
"अरे छोड़ो, रास्ते में हमेशा की तरह भरवा लेना।"
"नहीं! अब बिना हेलमेट पेट्रोल पंप पर पेट्रोल नहीं मिलेगा।"
"तो क्या हुआ, हेलमेट लगाकर जाना।"
"अरे नहीं जी! तुम हर जगह अपनी टांग अड़ाने लगते हो। हेलमेट पहनकर जाने से मेरी हेयर स्टाइल बिगड़ जाएगी, अभी तो पार्लर से सेट करवाकर आई हूँ।"
नए सत्र की पहली सुबह स्कूल की घंटी बज चुकी थी, और नारद जी के बहीखाते में आधुनिक समाज की ये पाँच अनोखी रिपोर्ट दर्ज हो चुकी थीं।
-अशोक श्रीवास्तव,
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश