देश, नदी, मछलियाँ और हम (छंदमुक्त) - प्रसाद रत्नेश्वर



जितनी ज़रूरी है
मछलियों के लिए
नदी,
उतनी ही ज़रूरी हैं
नदी के लिए
मछलियाँ।
हमारे लिए देश,
देश के लिए हम।
न जाने
यह बात
क्यों नहीं समझतीं—
बंदूकें,
गोलियाँ
और
कानून-व्यवस्था के नाम पर
उन्हें चलाने वाले हाथ!

- प्रसाद रत्नेश्वर
मोतिहारी, बिहार

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