मुख्यपृष्ठछंदमुक्त देश, नदी, मछलियाँ और हम (छंदमुक्त) - प्रसाद रत्नेश्वर byबोधायन पत्रिका -जुलाई 07, 2026 0 जितनी ज़रूरी हैमछलियों के लिएनदी,उतनी ही ज़रूरी हैंनदी के लिएमछलियाँ।हमारे लिए देश,देश के लिए हम।न जानेयह बातक्यों नहीं समझतीं—बंदूकें,गोलियाँऔरकानून-व्यवस्था के नाम परउन्हें चलाने वाले हाथ!- प्रसाद रत्नेश्वरमोतिहारी, बिहार Tags छंदमुक्त पद्य Facebook Twitter