मुश्किलों से भरी डगर देखो,
हौसले से भरा जिगर देखो।
शक्ल-सूरत में क्या रखा साहब,
फेर कर दिल पे इक नज़र देखो।
खुशनुमा ज़िंदगी तेरी होगी,
इश्क़ की राहों से गुज़र देखो।
रंग हर सिम्त बिखर जाएगा,
रात को करके तो सहर देखो।
जेब खाली मगर न सामान है,
अब महंगाई का असर देखो।
आएगा चैन तक नहीं तुझको,
तुम भी जाकर कभी शहर देखो।
क्यों परेशान अब सभी दिखते हैं,
'साधना' बेवज़ह सफर देखो।
– साधना कृष्ण
शिक्षिका
वैशाली, बिहार