मुझे भी चाहिए मेरे हिस्से का कोना!
कहीं अलग… एकांत में,
जहाँ साँझ ढले जलता हो एक दीपक,
और महकता हो सुगंधित लोबान!
जहाँ रातें चाँद की दूधिया रोशनी से उस कोने को सजा देती हों,
जहाँ जुगनुओं के संग आँख-मिचौली करते और चाँद से बतियाते रातें गुज़र जाती हों,
हाँ!
चाहिए मुझे मेरे हिस्से का कोना!
जहाँ मैं देख सकूँ… अपने हिस्से के ख़्वाब,
उन ख़्वाबों को पूरा करने की क्षमता के साथ!
एक ऐसा कोना,
जिसमें पैर रखते ही मुझे मिले,
मेरी अपनी चिर-परिचित ख़ुशबू,
और
मेरे जैसा ही कोई अपना!
जिससे घंटों हों मेरी बातें,
बिना किसी औपचारिकता के।
वहाँ हों… तो बस हम!
मेरे उस कोने में
झरोखों से आती हो नर्म-नर्म धूप,
जो दे जाती हो मुझे… नई सुबह की उष्णता,
और
जो ध्वनित कर देती हो… मेरे कंठ से,
माँ सरस्वती की वंदना!
मैं… अर्पित कर उनके चरणों में… कुछ पीत पुष्प,
माँग लूँ मैं थोड़ा सा ज्ञान
अपने लिए,
अपनों के लिए और
मानव मात्र के लिए।
बतिया लूँ थोड़ी देर,
बहुत दूर अकेले रह रही अपनी अम्मा से…
पूछ लूँ उसका हाल…
और
सीख लूँ उससे
एकल जीवन व्यतीत करने का हुनर…!
मेरे उस कोने में हो
मेरी पसंद का नर्म बिस्तर,
जिसपर हो,
मेरी ही पसंद की चादर… एकदम सफ़ेद!
जिसमें मुझे मिले,
अपनों जैसा ही अपनत्व,
एक दोहर भी हो… नर्म और मुलायम,
जिसे ओढ़ते ही मिट जाए,
मेरी दिनभर की थकान!
और हो… आंतरिक आनंद की अनुभूति
जिसे लिपटाए हुए…
मैं खो जाऊँ विस्मित कर देने वाले सपनों की दुनिया में…
कुछ अलग… कुछ विशेष देखने के लिए!
अपने हिस्से के उस कोने में
मैं सुनना चाहती हूँ
अपने पसंद का संगीत…
बिखेरना चाहती हूँ हरसिंगार के फूल…
…मुझे डूबना है उनकी ख़ुशबू में!
हाँ…
कभी-कभी
जब मैं बाहरी ताकतों से, लोगों के आडंबरों से,
तथा अराजकता और असहिष्णुता के असहनीय वातावरण से,
बोझिल हो जाती हूँ,
तब
मुझे चाहिए अपने हिस्से का कोना,
जहाँ मैं मिल सकूँ,
स्वयं से,
अपने क्षत-विक्षत हो रहे अस्तित्व को
समेट सकूँ स्वयं में!
अनुभव करूँ
असीम शांति…
इस वातावरण से मुक्ति…
— मौसमी प्रसाद
कोलकाता, बंगाल
विस्तृत परिचय
सम्प्रति : शिक्षिका, समाजसेविका मंच संचालक, साक्षात्कारकर्ता।
संयुक्त सचिव : हिन्दी साहित्य परिषद्,
काव्य गोष्ठी प्रबंधन : रचनाकार ……
सक्रिय सदस्य : नीलाम्बर ……
प्रदेश अध्यक्ष : कथाकुंज ……
प्रकाशन : प्रभात खबर, समाज्ञा, दैनिक जागरण, वर्तमान, हमारा मेट्रो आदि कई अखबारों एवं पत्रिकाओं में कविताएँ और लघुकथा प्रकाशित।
साझा संग्रह : नवरचना काव्य संग्रह, भारत का प्रथम महिला काव्य संग्रह, काव्यांजलि ई-पुस्तक आदि।
महिलाओं पर लिखी कविताओं पर भारत की प्रथम श्रृंखला के विश्वरिकार्ड में मेरी भी रचना शामिल ।
उपलब्धि : भारतीय संस्कृति संसद, रचनाकार, वारही, द मैजिक मैन एन चंद्रा, कल्पतरु, राष्ट्रीय कवि संगम, राष्ट्रीय बिहारी समाज, हिन्दी साहित्य परिषद् साहित्योदय, प्रेरणा दर्पण, आदि प्रतिष्ठित संस्थाओं से अनेक बार सम्मानित।
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