जीवन क्या है? (कविता) — नेहा भारती



जीवन क्या है? आगे बढ़ना,
ख़ुद को कल से बेहतर गढ़ना।

​डगर कठिन हो चाहे दुर्गम,
गिरें, उठें फिर सँभलें हमदम,
तूफ़ानों को पार कर चलें,
ख़ुद का हम विस्तार कर चलें,
आओ कहें हम फिर से ख़ुद को,
तुम ही तो हो मेरा गहना।
जीवन क्या है? आगे बढ़ना।

​बीत गया जो पल नहीं आता,
कभी किसी का कल नहीं आता,
जीवन कल में कहीं नहीं था,
जीवन कल में कभी न होगा,
अभी यहीं है, अभी यहीं है,
जीवन का तो यही है कहना।
जीवन क्या है? आगे बढ़ना,
ख़ुद को कल से बेहतर गढ़ना।

​सृजन करें, संधान करें हम,
ख़ुद अपना निर्माण करें हम।
कल से सुंदर, कल से अनुपम,
सबसे न्यारा, सबसे उत्तम;
बहती जीवन की धारा में,
हमको भी है साथ में बहना।
​जीवन क्या है? आगे बढ़ना,
ख़ुद को कल से बेहतर गढ़ना।।

​— नेहा भारती
पटना, बिहार

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