समयक सब कठपुतली अछि
जेना बुझू उड़ैत तितली अछि ।
कहियो उडय ओहि डाडि पर त
कहियो उडय जेना बिजली अछि।।
समयक कालचक्र मे बड़का छोटका
लम्बा मोटका कारी गोरका सब परैय अछि ।
रामो- रावण परलथि त हमसब कुन बलयारी छी
कंसो कृष्णो परल त लोकसब के बुधियारी अछि।
मिथिलाक मिथिलेशकुमारी सिया सन सुकुमारी
जे अपने लक्ष्मीस्वरूपा जीवन हुनक नारी अछि ।
बेटी भगवतीस्वरूपा तैयौ जीवन अंधियारी अछि
ठाम ठाम पर लक्ष्मण रेखा खीचल अछि।
सौसे घुमय दु:शाषण सन राक्षस भारि अछि।।
देखु डेग डेग पर राजनीतिक हस्तक्षेप कारी अछि
कोनाक बचत देशक लाज सौसें कफनक व्यापारी अछि ।
कियो तारा कियो छाता कियो गाछी तर मे ठाढ अछि
कियो हाथ मे घंटी डोलाबैय कियो सूर्य शिकारी अछि।।
- गायत्री झा
शिक्षिका
जनकपुर, नेपाल