ओ बारिश (छंदमुक्त) - डॉ. अमित कुमार मिश्रा


ओ बारिश!
जब तुम बरसना कहीं,
थोड़ा बरस जाना मुझ पर भी।
तुम बरसती हो पहाड़ों पर,
जंगलों को भिगोती हो,
नदियों में मिल जाती हो,
फिर क्यों न तुम
मुझे भी समझ लेती हो—
जंगल, पहाड़ या नदी?
मैं भीगना चाहता हूँ
तुम्हारी कोमल फुहारों से।
दूर व्योम के पार,
फेंक देनाचाहता हूँ
अपना आविष्कार रूपी छाता;
अब नहीं चाहता कि
मेरे-तुम्हारे बीच का,
अवरोध हो कोई छत।
मैं छत और छाता विहीन
जीवन जीना चाहता हूँ।
मैं भीगना चाहता हूँ,
आषाढ़ की पहली बारिश में।
तरबतर हो जाना चाहता हूँ,
सावन की फुहारों में।
डूब जाना चाहता हूँ,
भादों की लहरों में।
आश्विन मास में सूखना नहीं चाहता,
मैं चाहता हूँ कि
चैत्र, वैशाख में भी
जब बरसो कहीं, तो
थोड़ा मुझ पर भी बरस जाना।
ज्येष्ठ की तपती दोपहरी में
चुपके से भीगा जाना मुझे,
जब तप रहा हो मेरा तन-बदन।
ओ बारिश!
तुम भेद करना नहीं जानती,
तुम समान भाव से बरसती हो—
झोपड़ी और महल पर,
नदी और नालों में,
पर्वतों और मैदानों में।
फिर क्या नाराज़गी कि
बरस जाती हो धरा पर कहीं
और रूखा रह जाता हूँ मैं!
एक निहोरा मान लो मेरा
कि, जब तुम कहीं भी बरसो,
मुझे बुला लेना अपने पास।
मैं रहना चाहता हूँ सब जगह,
जो नहीं हूँ कहीं।
तुम अपने आगोश में ले
इतना भिगोना मुझे कि
पिघलकर बह जाएँ
मेरे मन की ग्रंथियाँ और मैं
हो जाऊँ वैसा ही निर्मल,
जैसा कि हो जाते हैं पेड़—
बारिश में धुलने के बाद।

- डॉ. अमित कुमार मिश्रा
आत्मज : श्री दिनेश कुमार मिश्रा एवं श्रीमती हीरा देवी
पता : ग्राम एवं पोस्ट जानीपुर, जिला सीतामढ़ी, बिहार 843333
शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी.
सम्प्रति : सहायक प्राध्यापक (तदर्थ), एच. एस. कॉलेज, उदाकिशुनगंज
प्रकाशन : 'बिहार की हिंदी साहित्यिक पत्रकारिता' (आलोचनात्मक), जुतों के दौर में पांव' (काव्य संग्रह), 'एक सन्नाटा छोड़ जाऊंगा' (नज़्म संग्रह) 'अभीजना', 'अभीति', 'साहित्य के प्रकाश पूंज', 'चमकते कलमकार' आदि साझा संकलनों के साथ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी, लघुकथा, आलेख, समीक्षा आदि प्रकाशित।
सम्मान : बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन, पटना द्वारा 'हिन्दी रत्न' एवं 'युवा साहित्यकार सम्मान'।

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