“ज़ोरदार तालियों से स्वागत कीजिए श्री 'के' का, जिन्हें इस वर्ष के 'एंटरप्रेन्योर ऑफ़ द ईयर' अवार्ड से सम्मानित किया जा रहा है।”
“श्री 'के', आपसे अनुरोध है कि आप यहाँ बैठे सभी लोगों और टीवी पर देख रहे दर्शकों को अपनी सफलता का राज़ बताएँ।”
माइक को अपनी ओर करते हुए श्री 'के' बोले, “मैंने एक शब्द को मूल मंत्र बना लिया है और वह शब्द है—'आउटसोर्स'।”
“आउटसोर्स यानी जिसमें सेवाओं या उत्पादन के कार्य को किसी तीसरे पक्ष से करवाया जाता है; इससे होता है जॉब क्रिएशन और मनी ट्रांसफ़र…”
दर्शकों में आगे की पंक्ति में बैठे 'ए' ने 'बी' को कोहनी मारते हुए पूछा, “आज इतने बड़े दिन पर भी इनके परिवार से कोई उपस्थित नहीं?”
“एक रोड एक्सीडेंट में पिताजी स्वर्ग सिधार गए। माँ बच तो गईं, पर पलंग की होकर रह गईं।”
“पत्नी?”
“छोटे शहर की, धार्मिक प्रवृत्ति की है। महानगर की हवा उसे लगने नहीं दी। माँ की देखभाल उसे आउटसोर्स की हुई है…” 'आउटसोर्स' शब्द पर ज़ोर डालते हुए बी ने कहा।
“और यह लाल शिफ़ॉन की साड़ी में अध-लिपटा, गदराया बदन, मृगनयनी अप्सरा कौन है?”
“पत्नी का काम इन्हें आउटसोर्स किया हुआ है!”
तालियों की गड़गड़ाहट में 'ए' और 'बी' की भौंडी हँसी दब गई।
— शिवानी खन्ना
दिल्ली