हे गुरु! ज्ञान के दाता तुम,
तुम्हारे चरणों में शत-शत नमन!
मन के गहन कुंज-कानन में,
तम का साम्राज्य जब फैला था।
ज्ञान-प्रभा की ज्योति जलाकर,
आलोकित करते मेरा मन।
हे गुरु! ज्ञान के दाता तुम,
तुम्हारे चरणों में शत-शत नमन!
अक्षर-अक्षर शिक्षा देकर,
ज्ञान-भंडार भी भरते तुम।
जीवन भर उपकार न भूलूँ,
ऐसा हो मेरा अंतर-मन।
हे गुरु! ज्ञान के दाता तुम,
तुम्हारे चरणों में शत-शत नमन!
तेरे चरणों में मैं शीश नवाऊँ,
इस मेधा पर बलि-बलि जाऊँ।
हे ईश! इन्हें तुम स्वस्थ रखना,
जीवन भर इनका सुख पाऊँ।
हे गुरु! ज्ञान के दाता तुम,
तुम्हारे चरणों में शत-शत नमन!
- डॉ. पुष्पा गुप्ता
मुजफ्फरपुर, बिहार