आशीर्वाद की पुरवाइयाँ (छंदमुक्त) -डॉ. रशीद ग़ौरी


​हर रात

आवाज़ देकर

बुलाती हैं

घर की दीवारें,

खिड़कियाँ-दरवाज़े।

झूमर सा

उजियारा-प्यारा

मेरा घर, मेरा संसार।

रिश्तों की डोर

आवाज़ देती है वहाँ;

माँ की ममता,

पिता का स्नेह,

उनका साया,

उनका सरमाया,

देते हैं खुशियाँ

बेशुमार।

​वहीं

पिता के खाँसने की आवाज़

देती है गवाही

उनकी उपस्थिति की,

और मैं जागता रहता हूँ,

महसूसता हूँ

उन्हें और उनका दर्द।

​रात के सन्नाटे में

तैरती हैं

मेरे कानों से

हृदय तक,

आशीर्वाद की पुरवाइयाँ।

मेरे पिता की

मौजूदगी का एहसास

भर देता है उजास,

मन में खुशी

और आत्मविश्वास।

​.....

​डॉ. रशीद ग़ौरी, सोजत सिटी (राजस्थान)

​— वरिष्ठ कवि, लेखक व साहित्यकार। एकल कहानी संग्रह 'नीला आकाश' प्रकाशित। 'कश्मकश: ज़िंदगी की' (लघुकथा संग्रह) तथा 'सुनो, सूत्रधार सुनो' (कविता संग्रह) प्रकाशन प्रक्रियाधीन। राज्य सेवा से सेवानिवृत्त।



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