नदी किनारे मेरा घर (बाल कविता) - डॉ. सतीश चंद्र भगत

नदी किनारे है मेरा घर,
घर के आगे बाग-बगीचे।
कितने सारे पेड़ लगे हैं—
आम, अमरूद और शरीफ़े!

बागों में हर दिन खिलते हैं,
सुगंधित रंग-बिरंगे फूल।
हर्षित है मन फल-फूलों से,
सभी मौसम लगते अनुकूल।

चिड़ियों से रहती चहल-पहल,
फूलों से तितली बतियाती।
खुश हैं सारे लोग यहाँ पर,
दादी-अम्मा सब इठलातीं।

बहुत लाभ मिलते हैं भैया,
बाग-बगीचे और नदी से।
हरियाली अच्छी लगती है,
घर में रहते सभी खुशी से!


— डॉ. सतीश चन्द्र भगत
         दरभंगा, बिहार 

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