पुपरी (छंदमुक्त) - डॉ. अमित कुमार मिश्रा

आज फिर तुम्हारे शहर से गुज़रा हूँ,

वही पहली मुलाक़ात-सा एहसास लिए।

शाम का नज़ारा दिखा—

कालिमा के आग़ोश में

छिपता लाल (नहीं, 'सिंदूरी'

कहना सिखलाया था तुमने)

रंग में ढलता हुआ।

दूर कहीं मंदिर की घंटी

बजाई किसी ने, तो महसूस हुआ—

तुम अब भी हो इसी शहर में कहीं।

तुम्हारी पायल की झंकार का

भ्रम उत्पन्न करती है

स्टेशन के पास वाले पुराने मंदिर की घंटी!

इतना लंबा अरसा बीतने के बाद भी

यह शहर वैसा-का-वैसा ही है,

मगर और लोग बात कर रहे थे—

"पहले से काफ़ी बदल चुका है 'पुपरी'।"

मैं फिर देखता हूँ ध्यान से, मगर

मुझे ठीक वैसा ही लगा जैसा देखा करता था

तुम्हारे साथ गोधूलि में घूमते हुए,

या यह भी हो सकता है कि

बदल गया हो शहर, मगर

मैं देख रहा होऊँ वही वर्षों पुरानी

आँखों में बसी तस्वीर!

तुम्हारे शहर से इस बार भी गुज़रा हूँ

शाम में ही...

यह भी कैसा इत्तफ़ाक़ है कि मैं

दिन के उजाले में नहीं देख सका हूँ तुम्हारा शहर!

और मुझे तो यक़ीन है, कभी दिन में देखूँ तो

पहचान भी न सकूँ इसे।

मैं पहचानता हूँ इसे—

शाम में सिंदूरी होते आसमान से,

मैं पहचानता हूँ इसे—

स्टेशन के पास वाले मंदिर की घंटी

की आवाज़ से,

मैं पहचानता हूँ इसे—

तुम्हारी पायल की झंकार से, और

हाथों में लिए तुम्हारे हाथों की

गर्माहट से!

हाँ, कुछ और धुंधली पहचान है

इस शहर की, जिससे मिलवाया था तुमने—

मसलन, स्टेशन के पास वाली

लौंगलता की दुकान का पहचाना स्वाद,

सिनेमाघर की जानी-पहचानी डगर,

और ऐसी ही कुछ-एक चीज़ें।

मगर आज रुककर यह सब

देखने-महसूसने का अवसर नहीं था

(चाहत शायद थी अब भी),

दो मिनट रुककर चल पड़ी ट्रेन, और

निगाहों से ओझल होता गया

स्टेशन-बोर्ड पर लिखा— 'जनकपुर रोड'।

जनकपुर रोड यानी तुम्हारा शहर...

यानी 'पुपरी'।

शहर से गुज़रते ही एक बार फिर

सीने में बाईं ओर महसूस हुआ—

जाना-पहचाना दर्द, और

हाथों में तुम्हारे हाथ की गर्माहट!



- डॉ.अमित कुमार मिश्रा 

सहायक प्राध्यापक, हिन्दी विभाग 

एच.एस.कॉलेज, उदाकिशुनगंज, मधेपुरा 

प्रकाशित पुस्तकें - बिहार की साहित्यिक पत्रकारिता का इतिहास (आलोचना), जुतों के दौर में पांव (कविता संग्रह), एक सन्नाटा छोड़ जाऊंगा (काव्य संग्रह)

साहित्य अमृत, वागर्थ, साहित्य यात्रा, बोधिसत्व, अमर उजाला आदि में कविताएं प्रकाशित।

राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 40 शोध आलेख प्रकाशित।

नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय के लिए पाठ्य-पुस्तकों का लेखन।


पता - ग्राम एवं पोस्ट - जानीपुर, गाछी टोला, जिला - सीतामढ़ी, बिहार, पिन - 843333

संपर्क - 9304302308



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