आज की लैला (लघुकथा) - सेवा सदन प्रसाद

एक लड़की को एक लड़के से प्यार हो गया, जो एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। लड़की का नाम है— लैली, प्यार की प्यासी एक अलबेल/अल्हड़ बाला। लैली का आशिक मजनू, बिल्कुल मजनू की तरह।  
अचानक परिवारवालों ने लैली की शादी तय कर दी— एक खूबसूरत शहज़ादे के साथ। शहज़ादा लैली को देखते ही उसकी खूबसूरती पर फिदा हो गया। हुस्न एक और उसके दीवाने दो, पर उसे तो अपना पुराना मजनू ही पसंद है। लैली तब पेशोपेश में पड़ गई। परिवारवालों को कैसे समझाए? अगर सच बताती है तो जीवन नर्क बन जाएगा। गर बगावत करती है तो परिवार की बदनामी होगी। दिमाग में उथल-पुथल मचने लगी, पर चेहरे पर मुस्कान बनाए रखी।  
मन ही मन यह फैसला कर लिया कि अतीत में तो लैला मरी थी, पर इस बार मजनू को मरना होगा, तभी वह अपने मजनू को हासिल कर पाएगी। परिवार और समाज तो उस पर मानसिक दबाव डालकर उसकी खुशियों का गला घोंट देंगे। इंसान कभी-कभी इतना स्वार्थी हो जाता है कि मात्र अपनी खुशी के लिए जघन्य से जघन्य अपराध करने से भी नहीं घबराता।  
और पल भर में एक नया इतिहास रच डाला— न लैला मरी न मजनू। शहीद हो गया शहज़ादा.... प्यार का एक प्यादा।  


- सेवा सदन प्रसाद
     मुंबई, महाराष्ट्र 
  मो. 9619025094  

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