"रीता, तोरा बिआह करे के मन नs करइत हऊ?"
"केकरा से बिआह करू मोनी!"
"कइसन बात करइत हते! कोनो लरिके न तोरा देखाई देइत हऊ, जेकरा तूँ......?"
"देखाई तs देइत हए ......।"
" तs फेर.....?"
"सखी ! हम लरीके में माय - बाबूजी के अल्लग होइत देखले हती। ऊ दुन्नों गोटा के अल्लग होइत देखनाई असान न रहे, बाकि देखली।"
"आरे, ऊ ओ लोग के जीवन रहई, तूँ अप्पन देख न!"
"सखी! इन्सान पर असानी से भरोसा करे में डर लगइत हए।"
- डॉ. विद्या चौधरी
पटना , बिहार