माता रानी जग-कृपालु,
जीव-जगत कल्याणी।
जय-जय जगदंबा! ब्रह्मा, विष्णु,
महेश्वरी अवतारिणी।।
कष्ट, क्लेश, विघ्न, बाधा,
सर्व दुःख-दारिद्र्य नाशिनी।
जय माँ दुर्गा! भक्तवत्सला,
प्राकट्य सुखप्रदायिनी।।
विश्वव्यापी विपत्तियों की,
माँ सकल मुक्तिदायिनी।
जयंती, मंगला, काली, विशाला,
भद्रकाली, कृपा-कपालिनी।।
अखंड, अनंता, रूप साकार,
निरंकार, सर्वगुणधारिणी।
जगत-माता, जगत-कल्याणी,
दुर्गा-रूप व्याख्यायिनी।।
विघ्न-बाधा हरण करो सब,
त्रिनेत्रा माता शूलधारिणी।
भक्तवत्सला, मधुकैटभहंत्री,
सर्व सुख-संपत्ति प्रदायिनी।।
मातृस्वरूपिणी, यशस्वंतं,
समस्त रोग-व्याधि नाशिनी।
जयति जय मंगला भवानी!
जय-जय माँ विंध्यवासिनी!
— मनीषा सहाय 'सुमन'