दो खबरें अख़बार में— यह चुनाव है खेल,
और दूसरी बात यह— सारे जाओ जेल।
हवा पकड़ने को चली दिल्ली की सरकार,
ठीक सामने में खड़ी व्रत की है भरमार।
जन्म लिया, आफ़त लिया, जब देखो बीमार,
कभी एलर्जी हो रही, कभी सर्दी-बुख़ार।
दिल्ली को दो मार है, देश को है यह कष्ट,
यह वर्षा की भीषणता, उस पर सब कुछ भ्रष्ट।
दिल्ली के माहौल में बुरे यहाँ कुछ लोग,
कल सुनवाई होएगी, सूर्यकांत का योग।
यूँ कहते हैं लोग यह— नशा पाप का मूल,
पर पंजाबी वीर के अलग दिखे असूल।
यहाँ विरोधकर्ता मिला, किया उसी का ख़ून,
वाह-वाह पंजाब है! तेरा क्या कानून!
— त्रिपुरारी कुमार पाण्डेय